राजस्थान के गांव अब नशे की फैक्टरियों में बदलते जा रहे हैं। पुलिस ने सिर्फ पिछले 4 महीने में 635 करोड़ रुपये से ज्यादा का नशा पकड़ा है और 300 से ज्यादा लोगों को जेल भेजा है।सबसे ताजा और बड़ा ऑपरेशन जोधपुर के लूणावपुरा (बालेसर) में हुआ। एंटी नार्कोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) की टीम रात में छापा मारने पहुंची तो तस्कर छत पर चढ़ गए और पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी।
पुलिस ने भी जवाबी फायरिंग की और हापूराम, बुधराम, नरेश समेत 5-6 आरोपियों को पकड़ लिया। मौके से 170 किलो के करीब तैयार MDMA (एक्सटसी) बरामद हुई, जिसकी कीमत करीब 90 करोड़ रुपये बताई जा रही है। साथ में केमिकल्स, मशीनें और पूरा सेटअप भी जब्त हुआ।पुलिस कह रही है कि ये फैक्टरियां अब सिर्फ बॉर्डर वाले इलाकों तक नहीं रुकीं।
बाड़मेर, जालौर, जोधपुर के अंदरूनी गांवों, खेतों और पुरानी झोपड़ियों में भी ये चल रही हैं। गुजरात से लोग आकर लोकल युवाओं को ट्रेनिंग दे रहे हैं। मुंबई-दिल्ली से फॉर्मूला लेकर अब गांव के लड़के खुद MDMA बना रहे हैं। पापड़ के पैकेटों में पैक करके बाहर भेजते हैं।
ANTF के IG विकास कुमार ने कहा, “जेल से छूटते ही इनकी शादी हो जाती है। फिर सोशल मीडिया पर इन्फ्लुएंसर बनकर नेटवर्क फैलाते हैं। डिमांड रहेगी तो सप्लाई भी होती रहेगी।”मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देश पर पूरे राज्य में 18 स्पेशल एंटी-नार्कोटिक्स चौकियां बना दी गई हैं और ‘ऑपरेशन विशग्रहण’ चल रहा है। लेकिन समस्या ये है कि गांवों में नशे की लत भी तेजी से बढ़ रही है। दौसा, सवाई माधोपुर जैसे जिलों के अस्पतालों में रोज नए-नए केस आ रहे हैं।
पुलिस अब सिर्फ सप्लाई रोकने पर नहीं, डिमांड कम करने पर भी जोर दे रही है। वरना ये जहर पूरे राजस्थान के गांवों को खा जाएगा।क्या लगता है आपको? सिर्फ पकड़-पकड़ कर थक जाएंगे या कुछ और करना चाहिए?



