बजट 2026 का कड़वा सच: चमकदार आंकड़ों के बीच आम आदमी की अनसुनी चीख
वित्त मंत्री द्वारा पेश किया गया बजट 2026 हेडलाइंस में तो बहुत आकर्षक लगता है, लेकिन जब हम इसकी गहराई में उतरते हैं, तो यह “भविष्य के सपनों” के नाम पर “आज की हकीकत” को नजरअंदाज करता नजर आता है।
सरकार ने कैंसर की दवाओं को सस्ता करने और 7 हाईस्पीड रेल कॉरिडोर बनाने का वादा करके एक मानवीय चेहरा पेश करने की कोशिश की है। लेकिन क्या एक न्यूज़ पोर्टल के रूप में हमें केवल यही देखना चाहिए? कतई नहीं। एक निष्पक्ष पत्रकारिता का धर्म है कि वह उन कमियों को भी उजागर करे जिन्हें आंकड़ों के जाल में छिपाने की कोशिश की गई है।
नौकरीपेशा वर्ग पिछले दो वर्षों से महंगाई की मार झेल रहा है। उम्मीद थी कि इस बार टैक्स स्लैब में बदलाव होगा और 10 लाख तक की आय को टैक्स फ्री किया जाएगा। लेकिन सरकार ने इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव न करके मध्यम वर्ग के साथ एक तरह का ‘साइलेंट फ्रॉड’ किया है। जब महंगाई बढ़ रही हो और टैक्स स्लैब वही रहे, तो इसका तकनीकी मतलब है कि आपकी वास्तविक बचत कम हो गई है। यह बजट मध्यम वर्ग की जेब खाली करने वाला है।
राजस्थान के जैसलमेर और बीकानेर जैसे रेतीले इलाकों में खेती करना वैसे ही चुनौती है। सरकार बजट में कृषि तकनीक और ड्रोन की बात तो कर रही है, लेकिन PM किसान सम्मान निधि की 6000 रुपये की राशि में एक नया पैसा नहीं बढ़ाया गया। क्या सरकार को नहीं पता कि पिछले साल में खाद और डीजल के दाम कितने बढ़े हैं? किसानों को तकनीक के सपने दिखाए जा रहे हैं, लेकिन उनकी फसल के सही दाम (MSP) और नकद राहत पर बजट पूरी तरह मौन है।
बजट में 7 हाईस्पीड रेल कॉरिडोर की घोषणा की गई है। यह सुनने में अच्छा लगता है, लेकिन ये प्रोजेक्ट्स कब पूरे होंगे और कितने लोगों को वास्तव में रोजगार देंगे, इसका कोई ठोस रोडमैप नहीं है। देश का युवा आज सरकारी नौकरियों की कमी और संविदा भर्तियों से त्रस्त है। बजट में स्टार्ट-अप के लिए तो बहुत कुछ है, लेकिन उस ग्रामीण युवा के लिए क्या है जो भर्ती परीक्षाओं के रद्द होने और बेरोजगारी से जूझ रहा है? युवाओं के लिए यह बजट केवल “सपनों का सौदागर” साबित हो रहा है।
कैंसर की 17 दवाओं को कस्टम ड्यूटी फ्री करना एक अच्छा कदम है, इससे इनकार नहीं किया जा सकता। लेकिन क्या केवल दवाएं सस्ती करना काफी है? 3 नए आयुर्वेदिक एम्स की घोषणा करने से पहले सरकार को उन जिला अस्पतालों और पुराने एम्स की सुध लेनी चाहिए थी जहां आज भी स्ट्रेचर और ऑक्सीजन की कमी है। राजस्थान के सुदूर इलाकों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की हालत किसी से छिपी नहीं है। नई घोषणाएं पुरानी विफलताओं को ढकने का एक तरीका मात्र हैं।
पेट्रोल-डीजल को GST के दायरे में लाने या इनकी कीमतों को नियंत्रित करने के लिए बजट में कोई घोषणा नहीं की गई। जब तक ईंधन महंगा रहेगा, परिवहन महंगा होगा और सब्जी से लेकर अनाज तक सब कुछ महंगा होगा। सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए लाखों करोड़ आवंटित किए हैं, लेकिन आम गृहिणी के बजट को संतुलित करने के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया।
बजट 2026 चमकदार पैकिंग के अंदर एक ऐसी वस्तु की तरह है जो भविष्य में तो शायद काम आए, लेकिन वर्तमान की जरूरतों के लिए अपर्याप्त है। न्यूज़ एक्सेल मीडिया हमेशा जनता के पक्ष में खड़ा रहेगा और हम सरकार से मांग करते हैं कि वह कागजी घोषणाओं से इतर जमीन पर उतरकर आम आदमी की समस्याओं का समाधान करे।



