जोधपुर: साध्वी प्रेम बाईसा की मौत मामले में पहली FIR – कंपाउंडर पर लापरवाही का केस दर्ज
मामले की मुख्य बातें
- 28 जनवरी को आश्रम में साध्वी की तबीयत बिगड़ने पर कंपाउंडर देवीसिंह ने उन्हें डेक्सेना (Dexona) और डाइक्लोफेनिक (Dynapar) जैसे H-शेड्यूल इंजेक्शन लगाए।
- इन इंजेक्शनों को डॉक्टर की पर्ची के बिना लगाना चिकित्सा नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है।
- साध्वी अस्थमा की मरीज थीं; विशेषज्ञों के मुताबिक ऐसे इंजेक्शन से गंभीर रिएक्शन हो सकता है।
- इंजेक्शन लगने के महज 20 मिनट बाद उनकी हालत और बिगड़ी और प्रेक्षा अस्पताल में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।
- FSL और मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट में मौत का मुख्य कारण फेफड़ों की गंभीर बीमारी से उत्पन्न हार्ट अटैक (कार्डियोपल्मोनरी अरेस्ट) बताया गया है। जहर या साजिश के कोई सबूत नहीं मिले।
SIT जांच में क्या सामने आया?
एसीपी छवि शर्मा के नेतृत्व वाली विशेष जांच टीम (SIT) ने 20 दिनों में कंपाउंडर से 5 बार पूछताछ की। आरोपी ने हर बार अलग-अलग बयान दिए:
- पहले 3 महीने पुरानी पर्ची का हवाला दिया।
- फिर मेडिकल स्टोर से दवा खरीदने का दावा किया – जिसे स्टोर संचालक ने खारिज कर दिया।
- मेडिकल बोर्ड और FSL से मिले जवाबों में लापरवाही के स्पष्ट प्रमाण मिले।
अभी भी बाकी सवाल
- तबीयत बिगड़ने पर अस्पताल क्यों नहीं ले जाया गया और घर पर ही H-शेड्यूल इंजेक्शन क्यों लगाए गए?
- अस्थमा मरीज को ऐसे इंजेक्शन के जोखिम की जानकारी होने के बावजूद यह फैसला क्यों लिया गया?
पुलिस अब अन्य संभावित लापरवाही और जिम्मेदार लोगों की भूमिका की गहन जांच कर रही है। यह मामला जोधपुर के आश्रम परिसर से जुड़ा होने के कारण धार्मिक और सामाजिक संवेदनशीलता भी रखता है।
स्रोत: दैनिक भास्कर, जोधपुर ब्यूरो | मूल खबर के आधार पर संपादित एवं पुनर्लेखित



